कहते हैं द्वापर युग तक पढ़े लिखे विद्वान लोग भविष्य में झाँक लेते थे, यहाँ तक कि सटीक नाम और स्थान भी बता सकते थे.
कहानी महाभारत कालीन है. युधिष्ठिर पाँच भाइयों की टीम के अगुआ थे. धर्मराज के नाम से भी जाने जाते थे. वस्तुतः धर्मराज नाम उनकी ढाल था, धर्म के नाम पर वह अपनी साम्यवादी और वामपंथी सोच को आगे बढ़ाने का काम करते थे. इस का सब से बढ़िया उदाहरण हैं – द्रौपदी. अर्जुन ने मछली की आँख में निशाना लगाने की शर्त जीती और साथ ही जीता द्रौपदी का पाणिग्रहण. जब सभी भाई माता कुंती के पास पहुँचे तो कुंती ने बगैर सच जाने, आम भारतीय मतदाता की तरह, कह दिया कि जो भी लाए हो सभी भाई बाँट लो. बाद में सत्य के उजागर होते ही कुंती ने अपने शब्द वापस लेने की भरपूर कोशिश की, लेकिन डाले गए मत की तरह वापसी संभव नहीं थी. आप महाभारत में हरेक पाण्डव के कुंती के अलावा कम से कम एक और पत्नी का उल्लेख पाएंगे, सिवाय युधिष्ठिर के. ऐसा क्योंकर संभव हुआ? दरअसल यह वामपंथी सोच थी – अर्जन कोई भी करे सब में बराबर बंटे. युधिष्ठिर इस सत्य को जानते थे कि वह भी वामपंथियों की तरह हैं कुछ भी कमा नहीं सकते, लेकिन साम्यवाद की आड़ में उपभोग तो कर ही सकते थे. इसमें एकपत्नीव्रती होने जैसी कोई बात नहीं थी.
समय बीतता रहा. फासीवादी सुयोधन (कालान्तर में दुर्योधन) ने वामपंथ को सत्ता देने से मना कर दिया. बल्कि समझ लें कि जैसे इंदिरा ने आपातकाल की घोषणा कर दी थी वैसे ही सुयोधन भी सत्ता के हस्तांतरण से मुकर गया. मुकरता भी क्यों नहीं उस के पास विशाल सेना थी, बड़े बड़े राजनैतिक सलाहकार थे और सब से बढ़ कर सूतपुत्र (दलित) कर्ण उस के पक्ष में था. जब साम्प्रदायिक पांडव कर्ण का उपहास करते तब सिर्फ युधिष्ठिर कर्ण का पक्षधर होता. फिर वही वामपंथी नीति – दलित उठ खड़े हुए तो भारत का इतिहास बदल जाएगा. यहाँ तक कि घोषणा कर दी यदि सत्ता हस्तांतरण होती है तो वह एक दलित (वैसे कहा था कि अपने बड़े भाई को; पर भावना वही थी) को अपना राजा स्वीकार कर लेंगे. उद्देश्य सत्ता की मलाई खाने का था – आप के सामने आज भी कर्णाटक का उदाहरण है. खैर, कर्ण नहीं माना. मानता भी क्यों? उस के पास दलित शक्ति थी, जिसका उपयोग वह कभी भी कर सकता था.
महाभारत का युद्ध समाप्त हो चला था. वामी युधिष्ठिर के नेतृत्व में साम्प्रदायिक (शेष) पाण्डवों की सरकार चल रही थी और कृष्ण अन्ना हज़ारे की तरह नेपथ्य में धकेल दिए गए थे. पाँचों भाई यात्रा पर थे, युधिष्ठिर को प्यास लगी. जैसी की वामी परम्परा है – खुद कुछ मत करो, दूसरों का दोहन करो और उसे साम्यवाद का चोला पहना दो, युधिष्ठिर ने सहदेव को आदेश दिया – जल ले कर आओ. पास के सरोवर में सहदेव ने मटकी डाली. सरोवर में एक यक्ष का वास था.
इधर सहदेव की मटकी ने जल का स्पर्श किया उधर यक्ष का अट्टहास गूँजा – “सावधान सहदेव, अगर जल चाहते हो तो मेरे प्रश्नों का का उत्तर दो”.
सहदेव – ठीक है पूछो जो पूछना चाहते हो
यक्ष – कौन हूँ मैं?
सहदेव:- तुम एक अतिक्रमंकारी हो. शीघ्र ही इस क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त करने का शपथ लेता हूँ.
बिजली कौंधी और सहदेव ढेर.
सहदेव नहीं लौटा तो नकुल वहां आया, फिर वही हुआ. यक्ष ने वही प्रश्न पूछा.
यक्ष – कौन हूँ मैं?
नकुल:- तुम भविष्य में केजरीवाल बनोगे. तुम एक नौटंकीबाज हो.
बिजली कौंधी और नकुल ढेर.
कुछ देर बाद अर्जुन वहां आया, फिर वही हुआ. यक्ष ने वही सवाल पूछा.
यक्ष – कौन हूँ मैं?
अर्जुन – तुम कलियुग में वाड्रा के नाम से जाने जाओगे. वर्तमान में यक्ष के रूप में सरकारी जमीन पर कब्ज़ा किये बैठे हो. तुम्हें यह जमीन दुशासन ने दिलवाई है जो कलियुग में हुड्डा के नाम से जाना जाएगा.
बिजली कौंधी और अर्जुन ढेर.
कुछ देर बाद भीम वहां आया, फिर वही हुआ. यक्ष ने वही सवाल पूछा.
यक्ष – कौन हूँ मैं?
भीम, जो एक गौरक्षक था, हत्थे से उखड़ गया – ज्यादा चूंचपड़ की तो उठा के पटक दूंगा और तुम्हारे रुधिर से अपनी प्यास बुझाऊंगा.
बिजली कौंधी और भीम ढेर.
अंत में प्यास का मारा युधिष्ठिर खुद वहाँ पहुंचा.
पहले की तरह ही यक्ष ने उसे भी ललकारा और पूछा – कौन हूँ मैं?
युधिष्ठिर – तुम माइनॉरिटी हो, यक्ष जाति के लोग कम होते हैं और चूँकि तुम अल्पसंख्यक हो तुम्हारे साथ बहुत ज्यादतियाँ हो रही हैं, यहाँ तक कि तुम्हारे पास रहने को अपना घर भी नहीं है, तुम सरोवर में छुप कर रहते हो.
यक्ष – ह्म्म्म उम्दा, जीवन का उद्देश्य क्या है?
युधिष्ठिर – जीवन का उद्देश्य सेक्युलरिज्म है
यक्ष – संसार में दुःख क्यों है?
युधिष्ठिर – संसार में दुःख बहुसंख्यकों के कारण है. हिन्दू मुसलमान को मार रहा है, ईसाई को मार रहा है, यहाँ तक कि हिन्दू को भी मार रहा है. दरअसल संसार में दुखों की जड़ भगवा आतंकवाद ही है. तुम जैसे अल्पसंख्यक तो शांतिप्रिय लोग हैं जो बस अपने मत के प्रसार के लिए अक्सर अनिवार्य हिंसा के सहारे अपना अस्तित्व बचाए रखने में सफ़ल हो रहे हैं. मेरी सरकार में तुम्हें सभी सुविधाएं मिलेंगी. बस हमें चन्दा और Vote देते रहना.
यक्ष – भाग्य क्या है?
युधिष्ठिर – अल्पसंख्यक समुदाय में पैदा होना, या कोटे वाली जाति में पैदा होना ही भाग्य है।
यक्ष – सुख और शान्ति का रहस्य क्या है?
युधिष्ठिर – सदैव हिन्दू धर्म की निंदा करना, हिन्दुओं की हत्याओं को गौण मानना, माइनॉरिटी पर हुई छोटी छोटी से घटना की घोर निंदा करना, प्रधान मंत्री का इस्तीफ़ा माँगना ही सुख और शान्ति का रहस्य है
यक्ष – चित्त पर नियंत्रण कैसे संभव है?
युधिष्ठिर –जब कभी भी हिन्दू धर्म पर कोई आक्षेप या प्रहार हो तो वहां से हट जाना या फिर तटस्थ हो जाने से चित्त पर नियंत्रण संभव है
यक्ष – सच्चा प्रेम क्या है?
युधिष्ठिर – अपने धर्मं का अनादर, दूसरो का आदर
यक्ष – बुद्धिमान कौन है?
युधिष्ठिर – जो बिना कोटे के भी सरकारी नौकरी पा ले वही बुद्धिमान है
यक्ष – कमल के पत्ते में पड़े जल की तरह अस्थायी क्या है?
युधिष्ठिर – भारत में हिन्दुओं का भविष्य
यक्ष – नरक क्या है?
युधिष्ठिर – दोज़ख का पर्यायवाची शब्द
यक्ष – दुर्भाग्य का कारण क्या है?
युधिष्ठिर – कलियुग में भारत का प्रधान मंत्री मोदी
यक्ष – सौभाग्य का कारण क्या है?
युधिष्ठिर – कलियुग में दिल्ली का मुख्यमंत्री केजरीवाल
यक्ष – सारे दुःखों का नाश कौन कर सकता है?
युधिष्ठिर – मोदी को छोड़ के कोई भी कर सकता है, मोदी बस दुःख ही दे सकता है
यक्ष – दिन-रात किस बात का विचार करना चाहिए?
युधिष्ठिर – देश में सेक्युलरिज्म की तूती कैसे बोले?
यक्ष – सबसे बड़ा प्रश्न क्या है
युधिष्ठिर – बीफ बैन आखिर क्यों?
यक्ष – काजल से काला क्या है?
युधिष्ठिर – दो हजार दो गुजरात दंगो के दाग
यक्ष – सबसे सम्मानित लोग कौन है?
युधिष्ठिर – अकादेमी अवार्ड विजेता लेखक और कवि, जिन्होंने अपने अवार्ड्स की वापसी कर दी.
यक्ष – सबसे बड़ा सत्य क्या है?
युधिष्ठिर – कलियुग में देश में कभी भी कोई दंगे नहीं हुए, जैसे ही मोदी PM बना वैसे ही दंगे शुरू हो गए
यक्ष – सबसे बड़ा असत्य क्या है?
युधिष्ठिर – भारत देश प्रगति कर रहा है, या फिर कर भी सकता है
यक्ष – कौन सी विचारधारा सबसे उत्तम है?
युधिष्ठिर – वामपंथी
यक्ष – कौन सी विचारधारा सबसे निम्न है?
युधिष्ठिर – राष्ट्रवादी
और अंतिम प्रश्न :
यक्ष ― संसार का सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?
युधिष्ठिर ― हज़ारों वर्षों तक ज़ुल्म, दर्दनाक हत्यायें, अनगिनत मंदिरों के ध्वंस के पश्चात देश के विभाजन और सेक्युलर तथा वामपंथी तत्वों के भारत में प्राकट्य के बाद भी हिंदू राम मंदिर बनाने और हिंदूराष्ट्र स्थापित करने का स्वप्न देखते हैं, यही सबसे बड़ा आश्चर्य है.
यक्ष ने प्रसन्न हो कर युधिष्ठिर को न सिर्फ जल प्रदान किया बल्कि उन श्रेष्ठ प्रश्नोत्तरों के बदले में एक भाई को पुनर्जीवित करने का वरदान भी दिया. युधिष्ठिर ने नकुल को जीवित करने की मांग की. यक्ष ने पूछा – हे धर्मराज, अर्जुन और भीम के रहते नकुल क्यों? युधिष्ठिर मुस्कुराया और कहा – यक्ष, आजकल की युवतियाँ धनुर्धर और पहलवानों को कोई भाव नहीं देतीं, उन्हें तो बस TDH चाहिए, अब नकुल में वह खासियत है. उसे कोई और मिलेगी तो शेयरिंग तो होगी, वामपंथ की परम्परानुसार. यक्ष ने युधिष्ठिर की साफगोई से प्रसन्न हो कर सभी भाइयों को पुनर्जीवित कर दिया.